जो मध्यमवर्ग राष्ट्र और राष्ट्रवादी पथ पर चलने को सबसे ज्यादा जज्बा
रखता हैं वही राष्ट्रवादी सरकार के चाभुक से आज सबसे ज्यादा पीटा जा रहा
----
क्या प्रधानमंत्री मोदी जी मध्यम वर्ग को अपने
विकास मॉडल के तस्वीर में जबरनिया आगे बढ़ा देना चाहते हैं या फिर
मध्यमवर्ग की कैटगरी को समाप्त ही कर देना चाहते हैं यह सवाल अब मध्यम
वर्ग को सताने लगा हैं ?
**************
ऐसी स्थिति परिस्थिति में दो ही विकल्प होते हैं ---------
■ एक में मध्यमवर्ग आगे बढ़ जाये ।
■तो दूसरे में मध्यमवर्ग अति निम्न की दिशा में चला जाये
और मध्यम वर्ग का विकल्प ही समाप्त हो जाये ।
मैं यह तो नहीं कह सकता कि मोदी जी की कार्य प्रणाली में मध्यम वर्ग
विल्कुल सहभागी ही नहीं पर मैं यह भी नहीं मान सकता कि मध्यम वर्ग सिर्फ
सरकार सहयोगी व उनका अनुकरण करने वाली चरित्र की ही हो ।
♀अभी तक सरकार
के द्वारा किये गए बड़े फैसले में मध्यम वर्ग ही तो सबसे ज्यादा
#प्रभावितऔरप्रभावी हुआ हैं यह तो सरकार को समझना और मानना ही होगा ।
क्यों
की वर्तमान सरकार को बनाने और वर्तमान सरकार को बढ़ाने में मध्यम वर्ग की
भूमिका सरकार अगर नजरअंदाज करती हैं तो जनविश्वास के साथ यह एक बड़ा
विश्वासघात सा होगा ऐसा मुझे लगता हैं ।
धनवान वर्ग और कारपोरेट वर्ग तो
सत्ता के साथ हर समय गलबहियां बनाकर चलता ही रहा हैं इसमें कोई नई बात तो
नहीं ----बस पहले और आज में बस एक ही फर्क हैं कि पहले ओधोगिक घराने
राजनैतिक घरानों को सीधा लाभ पहुंचाते थे ।
पर अब वर्तमान सरकार में व्यक्तिगत कम दलगत ज्यादा सहयोग का चलन-प्रचलन में हो गया हैं ।
● अब सवाल हैं कि क्या मोदी सरकार सिर्फ चौकाने वाले फैसले और बदलाव से ही मध्यमवर्ग को साधने के भ्रम से भ्रामित हैं ?
••••••••••••••••तो
ऐसे में कहूँ तो यह सच हैं कि निम्नवर्ग रोटी ,कपड़ा ,मकान और छोटी छोटी
अपनी आवश्यकताओं पर सरकारी कृपा पात्रता पाकर खुश हो जाती हैं कुछ छोटी
मोटी आर्थिक ,सामाजिक,जातिगत सहयोग पर अपना मताधिकार दान दे या बेच देती
हैं जब की धनवान अपने धनबल से सरकार का चहेता बन उसके करीब आ जाता हैं
लेकिन ये दोनों वर्ग राष्ट्र निर्माण के दायित्व ले चलने का जबाबदेही का
कोई संकल्प पत्र नहीं भरते कोई स्थायी जिम्मेदारी नहीं लेते ।
सिर्फ अवसर और अवसरवादिता को जीते हैं और उसी के हित में चलने की पसंद पर विश्वास करते हैं ।
जब
की मध्यम वर्ग समाज निर्माण से लेकर राष्ट्रवाद तक का सबसे सक्रिय
सहयात्री बन राष्ट्र समाज और सरकार के हित में सबसे ज्यादा काम आते हैं ।
---------जाने
अनजाने में जाने क्यों सरकार मध्यमवर्ग की जरूरतों उनकी आकांक्षाओं उनकी
मांगों को नजरअंदाज कर रही या कहे मध्यमवर्ग को हताश व निराश कर रहीं !
◆◆◆कुछ
एक घुन पड़ जाने से गेहूं अनुपयोगी नहीं होता इतनी समझ तो सरकार को होनी ही
चाहिए यह आशा अभिलाषा मध्यमवर्ग की सरकार से हैं इसे सरकार को संज्ञान में
रखना चाहिए ।
मध्य तंत्र के बिना प्रारम्भ या अंत की परिकल्पना के एक मिथ्या नीति हैं ।
यह कहना चाहता हैं!--- मोदी सरकार से मध्यमवर्ग और यही सुनना आज देश की जरुरत भी हैं ---
क्यों
की प्राथमिक चिकित्सा व तैयारी के बिना बड़ी सर्जरी सरकार के साथ साथ किसी
और के जान जोखिम में डालने वाली समझ की कारण बन सकती हैं ।
यह हैं आज मध्यमवर्ग की गुहार ।।
-------------चन्द्र भूषण मिश्र "कौशिक"
Saturday, February 20, 2021
"मोदी सरकार से लगाव-----मध्यम वर्ग का भाग्य या दुर्भाग्य
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