पहचानते हैं इन्हें, कौन है ये ? यह हैं ओड़िशा के हलधर नाग। जो कोसली भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। ख़ास बात यह है कि इन्होने जो भी कविताएं और 20 महाकाव्य अभी तक लिखे हैं, वे उन्हें ज़ुबानी याद हैं। सादा लिबास, धोती, गमछा और बनियान पहने, नाग नंगे पैर ही रहते हैं। ऐसे हीरे को चैनलवालों ने नहीं, मोदी सरकार ने पद्मश्री के लिए खोज निकाला था। संभलपुर विश्वविद्यालय में उनके लेखन के एक संकलन ‘हलधर ग्रन्थावली-2’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। हलधर नाग कक्षा तीसरी तक पढ़ें हैं इन्हैं राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा 2018 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
अभी तक पाँच थिसिज इनके नाम पर दर्ज हैं। ऐसी महान विभूतियों को परिवर्तन योगेश का दंडवत प्रणाम, जिनमें दिखावा नहीं, चुपचाप काम करने की लग्न। आज समाज में केवल मान सम्मान पाने की होड़। धन लोलुपता ही तथाकतिथ सामाज व राष्ट्र हित संस्थाओं का ध्येय।
Local Vocal News ऐसी महान विभूतियों को सदा प्रणाम करता रहेगा। जुड़िए परिवर्तन योगेश के साथ। भेजिए ऐसे लोकल जन का वृतांत और करिए उन्हें वोकल। व्हाट्सप्प : 9953175076
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