Friday, September 25, 2020

इंदिरा गाँधी चाहती तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय के हत्यारे पकड़े जाते


11 फरवरी 1968 को मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर ट्रैक के बीच में एक शव मिला था। ये शव किसी आम आदमी का नही, भारत के उस समय के सबसे प्रखर राष्ट्रवादी और सनातन धर्म प्रचारक नेता, पंडित दीनदयाल उपाध्याय का था। ये वो पंडित दीन दयाल उपाध्याय थे, जिनका सामना उस समय की प्रधानमंत्री ........इंदिरा गाँधी ही नही उनके पिता नेहरु भी करने से डरते थे। ये वो पंडित दीन दयाल उपाध्याय थे, जिन्होंने जनसंघ की नीव रख कर, भारत की राजनीती को एक नई पहचान दी। ये वो पंडित दीन दयाल उपाध्याय थे, जिन्होंने राष्ट्र धर्म के प्रचार में अपना जीवन लगा दिया।

इनके राष्ट्र के प्रति योगदान की बात जितनी की जाए कम है। बेहद साधारण से रहने वाले ये व्यक्ति, 11 फरवरी 1968 को रेल से पटना जा रहे थे, और उसी रात किसी ने उनकी हत्या कर शव मुगलसराय, जो अब पंडित दीं दयाल उपाध्याय स्टेशन हो गया है, पर फेक दिया। और अफ़सोस की हम इनके कातिलो का पता तक नही लगा पाए। इनकी हत्या पर 302 का मुकदमा भी नही चला, और Attempt to Murder का केस लगा कर 2 चोरो को मात्र 4 साल की सजा दे दी गई। ये कहकर की चोरो ने सिर्फ लूट के इरादे से उन्हें ट्रेन से धक्का दिया था। यहाँ तक की CBI भी इनकी हत्या को साबित नही कर पाई और आज भी इनकी मौत एक राज है

 उस समय की सरकार ने इतने बड़े नेता की हत्या को, इतने हलके में लिया और CBI जाँच के नाम पर मर्डर को सिर्फ attempt to murder दिखा कर केस खत्म कर दिया। वो अलग बात है की, दबे जुबान हर कोई इसे राजनितिक हत्या का करार दे रहा था, पर सुनने वाला कोई नही था उस समय।

नमन है उन्ही पंडित दीन दयाल उपाध्याय को, जिन्होने  25 सितम्बर 1916 को मथुरा के एक निर्धन परिवार में जन्म लिया और बचपन में ही अनाथ हो जाने पर भी, इन्होने स्नातक की पढाई तक गोल्ड मैडल हासिल किया। और अपनी दूरदर्शिता से इन्होने, नेहरु की हर गलत निति का विरोध कर,
उसका सही विकल्प भी दिया। पर अहंकारी और सत्ता के नशे में चूर व्यक्ति कहाँ किसी की सुनता है, और वैसा ही करते हुए नेहरु ने अपने जीवन में वो हर गलत फैसला लिया, जिसके चलते देश को काफी नुक्सान उठाना पड़ा।

Friday, September 11, 2020

बिहारियों को मुंबई से भगाने वाला ठाकरे परिवार खुद बिहारी है


 मुंबई की राजनीति में अगर आप जरा भी दिलचस्पी रखते हैं तो ठाकरे परिवार का नाम आपने जरूर सुना होगा। हम उसी ठाकरे परिवार की बात कर रहे हैं जो आए दिन अखबारों की सुर्खियों में बने रहते हैं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ये ऐसा नाम है जो मुम्बई वासियों के जुबां पर हमेशा ही आता रहता है। राज ठाकरे के हिस्से में है शिव सेना तो वहीं उद्धव ठाकरे के हिस्से में है महाराष्ट्र नव निर्माण सेना। ये दोनों बंधु महाराष्ट्र की अस्मिता पर अपनी राजनीति करते हैं।

दरअसल हाल ही में एक किताब लॉन्च हुई है जो कि पूरी तरह से ठाकरे परिवार पर बेस्ड है या यूँ कह ले कि ठाकरे बंधुओं का पूरा ऐतिहासिक परिचय इस किताब में दिया है। लेकिन इन सब के बीच कुछ खुलासे ऐसे भी हुए जिसे जानने के बाद हर कोई दंग रह जाएगा।

 सबसे पहले जान लेते उस किताब के बारे में जिसमें इनके बारे में कई खुलासे हुए है, उस किताब का नाम है The cousins Thackeray: Uddhav Raj and The Shadow of their senas इसके लेखक हैं पत्रकार धवल कुलकर्णी। इस किताब में दावा किया गया है वो यह कि बिहारियों को मुम्बई से बाहर निकलने वाले ठाकरे खुद बिहारी हैं। जी हां ये सुनकर आपको हैरानी जरूर हो रही होगी पर इस किताब की मानें तो यही सच है।

 आपने कई बार ये खबरें सुनी होंगी की ठाकरे द्वारा मुम्बई से यूपी व बिहारियों को बाहर निकाला जा रहा है पर उस दौरान आपको ये नहीं पता होगा कि ऐसा विरोधिपन दिखाने वाले ये ठाकरे बंधु खुद बिहारी ही हैं। इस किताब में राज ठाकरे व उद्धव ठाकरे के दादा केशव सीताराम ठाकरे की भी चर्चा की गई है जिसमें बताया गया है कि ठाकरे परिवार मूल रूप से चंद्रसेनी कायस्थ परिवार से संबंध रखता है। अगर आप इतिहास पर थोड़ा टटोलेंगे तो जान पाएंगे कि चंद्रसेनी कायस्थ परिवार के लोग मगध से जुड़े होते थे जो की बिहार के अंदर ही आता है।

 इस समुदाय के लोगों ने काफी लंबे समय तक मगध में निवास किया, पर आगे चलकर व्यपार, युद्ध या फिर अन्य काम के लिए ये मगध से बाहर चले गए। देखते ही देखते महाराष्ट्र में इनकी संख्या ज्यादा हुई और इनकी रिहायशी भी मजबूत हो गयी। अब इसी बात को लेकर बवाल हो रहा है कि अगर ठाकरे बंधु मूलरूप से मगध से संबंध रखते हैं तो अपनी ताकत व रिहायशी के बल पर मजदूरी करने वाले व गरीब तबके के लोग जो बिहारी मुम्बई में निवास कर रहे थे उनके खिलाफ ऐसा व्यवहार करना कितना जायज है।

इतना ही नहीं की रिपोर्टों में तो ये भी सामने आया था कि ये लोग यूपी बिहार से आये लोगों को मारकर, डरा धमकाकर बाहर निकाल रहे थें जिसका वीडियो भी सामने आया था लेकिन इस खुलासे के होने के बाद कई विपक्षी दल के नेता इसपर सवाल उठाने लगे कि खुद बिहार से होकर आप ऐसा कैसे कर सकते है?


परिवर्तन योगेश संस्थान की ओर से युवा संस्कार उपाधि अलंकरण 2022

  चन्दौली ब्यूरो / डीडीयू नगर, उत्तर प्रदेश पत्रकार परिषद द्वारा पूर्वांचल रत्न अलंकरण सम्मान समारोह 2022 का भव्य आयोजन नगर के केसरी नंदन उत...