जैसे ही हमारे सामने कोई देशभक्ति का गीत बजता है वैसे ही हमारे भीतर एक जोश और जज्बा जागृत हो जाता है। हमारे देश की रक्षा करने के लिए सैनिक अपने प्राणों की आहुति हंसते हंसते दे देते हैं। ऐसे ही एक वीर सपूत दिल्ली में हैं जिन्होंने कारगिल युद्ध की लड़ाई लड़ी। लांस नायक सतवीर सिंह दिल्ली के ही मुखमेलपुर गांव में रहते हैं। वह करगिल युद्ध के दिल्ली से इकलौते जाबांज हैं। 19 साल बीत गए, पैर में आज भी पाकिस्तान की एक गोली फंसी हुई है, जिसकी वजह से चल फिर नहीं सकते। बैसाखी ही एक सहारा है। यह योद्धा करगिल की लड़ाई जीते, मगर हक के लिए सरकारी सिस्टम से लड़ते हुए हार गए।
वह कहते हैं, ’13 साल 11 महीने नौकरी की। मेडिकल ग्राउंड पर अनफिट करार दिया। दिल्ली का अकेला सिपाही था। सर्विस सेवा स्पेशल मेडल मिला। सरकार ने जमीन व उस पर पेट्रोल पंप देने का वादा किया। उसी दरम्यान एक बड़ी पार्टी के नेता की तरफ से संपर्क किया गया। ऑफर दिया कि पेट्रोल पंप उनके नाम कर दूं। मैंने इनकार किया तो सब कुछ छीन लिया गया। 19 साल से फाइलें पीएम, राष्ट्रपति, मंत्रालयों में घूम रही हैं। आज तक कोई नहीं मिला। कोई मदद नहीं मिली। सम्मान नहीं मिला। डिफेंस ने सम्मान बरकार रखा।’ मजबूरन अब उन्होंने जूस की दुकान खोली और अब खुद ही ग्राहकों के जूठे बर्तन धो रहे हैं।
सतवीर सिंह ने करीब 14 साल फौज में रहते हुए देश की सेवा की। देश के लिए लड़ते हुए लांस नायक सतबीर सिंह के पैर में दो गोलियां लगी थी।जिसमे से एक गोली अभी भी उनके पैर में ही फंसी हुई है ,जिसकी वजह से वह ठीक से चल फिर नहीं सकते और बैसाखी ही एक सहारा है, पर उनको अपाहिज पैर में फंसी हुई इस गोली ने नहीं बल्कि देश के सड़े गले सरकारी सिस्टम और भ्रष्ट राजनीति ने कर दिया ,इन्होने देश के लिए करगिल की लड़ाई जीती , मगर अपने हक के लिए देश के सिस्टम से लड़ते हुए हार गए... ये देश के असली हीरो है।

