Friday, October 2, 2020
प्राइवेट स्कूलों में बढ़ती सामंती सोच अब जगजाहिर हैं ।
अब सवाल हैं कि क्या अभिभावक इन सामन्ती सोच से लड़ सकेगा-- जीत सकेगा ।
**************
■अपने बच्चे के लिए उज्ज्वल भविष्य का सपना देखने वाले अभिभावकों को आज प्राइवेट स्कूलों ने ऐसे ऐसे सपने दिखा दिये हैं की वो मान बैठा हैं कि स्कूल जितना वैभवशाली होगा वहा से निकले बच्चे उतना वैभव अर्जित कर सकेंगे । इस भ्रम के पीछे का सचं हैं कि भले शिक्षा का स्तर कुछ भी हो बस आव भाव में अंग्रेजियत दिखती रहनी चाहिए ! यही समझ हो गई है ज्यादातर अभिभावकों की --------
अगर तुम गुलाम रहने को तैयार हो तो वो गुलांमी करवाने को तैयार हैं यही सम्बन्ध हो गया हैं स्कूल और अभिभावकों के बीच ।
जब लूट का दौर होगा तो हम भ्रामित उसमें पिसेंगे और हमें पीसने वाले हमारा भोग करेगे यही तो परंपरा रही हैं
यही कारण हैं कि ---निजी स्कूल बिना रोक टोक के सामंती सोच के होते जा रहे ---
देश का कोई हिस्सा हो हर जगह का सच एक हो गया हैं कि प्राइवेट स्कूल आज लूट का अड्डा बन चुके हैं। इन बड़े स्कूलों में एडमिशन के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये का खेल होता है। एडमिशन के लिए स्कूल के बाहर प्रचार तंत्र और दलाल सक्रिय रहते हैं जो लाखों में रकम का वारा न्यारा कर एडमिशन को लोक प्रिय और स्टेट्स का प्रतिक बना हमें ,उनको ,सबको भ्रम में डाल देते है । इस खेल में सिर्फ बिचौलिए ही सक्रिय नहीं है, बल्कि सरकारी पदों पर बैठे कुछ रसूकदार लोग भी मिशन एडमिशन के इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। पहले तो ये सहज सुलभ और सस्ती शिक्षा का माखौल उड़ाते हैं फिर उसके संसाधनों को मिल बाट कर खा जाते हैं और अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ सामंती व्यवस्था में निज् लोभ लालच से जुड़ अनैतिकता को संरक्षण देने के साथ साथ उनका गुणगान करने लगते हैं ।
जब सैया भये कोतवाल तो डर काहे का -----
***********
यही कारण हैं कि आज अपनी पहुंच और रसूक का हवाला देते हुए ये सामंती स्कूल लोग अभिभावक को इस कदर परेशान करते हैं कि वह लड़ने से पहले ही हार स्वीकार कर लेते हैं ।
और फिर क्या ? लूट का यह सारा खेल सहजता से जारी रहता है बिना किसी रोकटोक के ----
और साथ गलबहियां करते रहते हैं स्कूल प्रबंधन, स्थानीय पुलिस, शिक्षा विभाग, प्रशासनिक अधिकारी, नेता,मिडिया और कुछ रसूकदार लोग ।
दिखावे के लिए वैसे तो सरकार प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के नाम पर वर्षों से जारी इस लूट पर लगाम लगाने के कई दावे करती है, लेकिन सभी खोखले ही साबित हुए है। सरकार की तरफ से फीस रेगुलेशन एक्ट लागू तो कर दिया है आदर्श घोषणाओं में तो यह भी कहा गया कि सरकारी लोगों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढेंगे पर उसे अमल में नहीं लाया जा सका। ऐसे में अभिभावकों का शोषण दोहन बेरोकटोक जारी है यह कहना भी आसान नहीं क्यों की शिकायत सुनने वाला भी आपको सुनने को पहले तो तैयार नहीं हैं और अगर सुन भी लिया तो उसका उत्तर स्कूलों के पक्ष में लिखा जाए इसका सौदा तो शिकायत सुनने से पहले ही तय कर रखा गया हैं ।
आज का सर्वमान्य सचं है की प्राइवेट सकूल कदम-कदम पर शोषण करते हैं। पहले स्कूल का महंगे फॉर्म लेने के लिए लंबी कतार, फॉर्म मिलने के बाद उसे जमा करने की कतार। इसके बाद बच्चे के नाम पर अभिभावकों को स्कूल प्रशासन के सामने इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरने का पाखण्डी अभियान । स्कूल में डोनेशन के नाम पर मोटी रकम चढ़ावा । 10 माह के शिक्षा काल के बदले 14 माह की फीस वसूली का प्रावधान ।
हर एक गतिविधि के लिए अलग अलग नाम से वसूली का प्रावधान ।
इस खेल में अकेले स्कूल ही हिस्सेदार नहीं हैं ।दलाल से लेकर सरकारी तबके पर बैठे लोगों तक को मोटी रकम लेनदेन का भ्रष्ट व्यवहार का लूट झूठ भी इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में शामिल हैं । यही कारण हैं की अभिभावकों को इतना प्रताड़ना सहने के बाद भी छात्रों को सही शिक्षा की कोई गारंटी नहीं होती।
छात्र की हर अच्छाई के लिए स्कूल को उपहार और कमजोरी के लिए अभिभावकों पर दंड भार यही इन निजी स्कूलों की अब तक की विशिष्ट उपलब्धि हैं । सचं तो यह भी हैं कि अतिरिक्त कोचिंग के बिना अभिभावक निश्चिंत नहीं हो सकते हैं की उनका बच्चा कुछ बेहतर सीख भी रहा हैं ।
इस समझ के बावजूद भी लूट नहीं रुकता और जारी होती रहती हैं शोषण की नई नई किश्ते जैसे ---
स्कूल यूनिफार्म कहां से लेनी है,
किताबों के लिए किस दुकान में जाना है,
बस या कार से बच्चे को स्कूल तक लाना है,
तो इसकी परेशानी अभिभावकों को खुद उठानी होगी या मनमांनी धन उगाही की बोझ उठानी होगी ।
इतना करने के बावजूद भी स्कूल जिम्मेदार नहीं। बच्चा पास कर गया तो स्कूल को श्रेय अगर फेल हो गया तो सब कुछ अभिभावक की जिम्मेदारी -----
पास छात्रों पर नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराने के बाद एक बार फिर से उसी यूनिफार्म, किताब के चक्कर से गुजार नई कमाई की नई जुगत का फिर से श्रीगणेश ।
और फेल के अभिभावकों को फिर लूट की चक्की में पीसने का उपदेशात्मक सन्देश ।
दया दुआ न शिक्षक से न छात्र से पर सरकार की सरकारी कागजो में स्कूलों में राइट टू एजुकेशन हैं ---ऐसी बड़ी बड़ी डिगें आपने भी सुनी होगी -----
आपने भी सुना होगा की सरकारें 25 फीसदी गरीब बच्चों के एडमिशन का क़ानूनी दावा होता है लेकिन सरकारी धन का गोलमाल करने के लिए स्कूल बच्चों की फर्जी सूची सरकार विभाग को दे देते हैं। आरोप तो यह भी है कि ऐसे बच्चों से स्कूल एक तरफ फीस लेता ही है दूसरी तरफ सरकार से भी उन्हीं बच्चों की सूची देकर बड़ी रकम ले लेते हैं। गरीब बच्चों के कोटे पर ही रिश्वत लेकर दूसरे बच्चों का भी एडमिशन कर दिया जाता है। स्कूलों के खेल में सरकार दलाल मालिक होते हैं और अभिभावक बलि के बकरे । सरकार की समान शिक्षा की मंशा कोरोना आपदा में तो नग्न सच के रूप में ही आम लोगो के बीच आ गईं ।
फीस और फिरौती दोनों की वसूली एक सा दिखी ।
--------------------------------------------------------------
अभिभावकों की विवशता को स्कूलों ने खूब भजाया या कह ले कोरोना आपदा के समय को स्कूली लुटेरों ने खूब अवसर के रूप में अपनाया ।
● स्कूल के मेसेज किसी धमकी से कम नहीं रहे .
● सरकार की नीति नियत अभिभावकों के हक में बिलकुल ही नहीं रही ।
●सब कुछ वसूला जाता रहा अभिभावकों को स्कूली स्वार्थ की चक्की में पिसा जाता रहा पर सरकार भी लाचार दिखी ।
◆विज्ञापन के नाम पर मीडिया को झुकाया गया बच्चो का भविष्य खराब कर देने के डर को दिखा अभिभावकों को सताया गया ।
●स्कूल सेवा केंद्र हैं इस सबसे बड़े झूठ को सरकार के मेलजोल से मिल अभिभावकों को जबरन स्वीकार कराया गया ।
●शिक्षकों को आगे कर लूट को आदर्श बता अभिभावक और शिक्षक दोनों को बंधक बना उनके अधिकार पर
कब्जा कर स्कूली दूकान चलाया गया ।
●स्कूली सोच को सामंती मान देकर सच को छुपाया गया अभिभावकों को डराया गया और चल रही लूट को आगे बढ़ाया गया ।
●आम जन लाचार रहा स्कूलों में दुराचार रहा नेताओं में स्वार्थ रहा और सरकार एक बार फिर इस बात का गवाह रही की ------
।लोक तंत्र झूठ हैं ।
देश में लुटेरों को मनमांनी लूट करने का छूट हैं ।।
मेरी समझ की बस एक छोटी सी कोशिश हैं हमारे बच्चों को बेहरत शिक्षा का आयाम मिले लूट झूठ शोषणकारी स्कूली काला कारोबार को विराम मिले ।
यही हैं ------
अभिभावकों की मांग
यही हैं ---शिक्षा आंदोलन का अभियान । ।
------------चन्द्र भूषण मिश्र "कौशिक"
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
परिवर्तन योगेश संस्थान की ओर से युवा संस्कार उपाधि अलंकरण 2022
चन्दौली ब्यूरो / डीडीयू नगर, उत्तर प्रदेश पत्रकार परिषद द्वारा पूर्वांचल रत्न अलंकरण सम्मान समारोह 2022 का भव्य आयोजन नगर के केसरी नंदन उत...
-
स्कूली बच्चों के अभिभावक और कान्वेंट विचार के निजी स्कूलों के प्रबंधक आमने-सामने और दर्शक बनी सरकार और सरकारी नीतियां !------एक समीक्षा ◆ ...
-
पहचानते हैं इन्हें, कौन है ये ? यह हैं ओड़िशा के हलधर नाग। जो कोसली भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। ख़ास बात यह है कि इन्होने जो भी कविताएं और ...

No comments:
Post a Comment